नबील' ऐसा करो तुम भी भूल जाओ उसे वो शख़्स अपनी हर इक बात से मुकर चुका है
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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'नबील' इस इश्क़ में तुम जीत भी जाओ तो क्या होगा ये ऐसी जीत है पहलू में जिस के हार चलती है
Aziz Nabeel
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मैं छुप रहा हूँ कि जाने किस दम उतार डाले लिबास मुझ को
Aziz Nabeel
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तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है
Aziz Nabeel
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ये लुत्फ़ मुझ पर किसलिए एहसान का क्या फ़ाइदा अब वक़्त सारा कट चुका, अच्छा-बुरा, थोड़ा-बहुत
Aziz Nabeel
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चाँद तारे इक दिया और रात का कोमल बदन सुब्ह-दम बिखरे पड़े थे चार सू मेरी तरह
Aziz Nabeel
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