नशा पिला के गिराना तो सब को आता है मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी
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वो अक़्ल-मंद कभी जोश में नहीं आता गले तो लगता है आग़ोश में नहीं आता
Farhat Ehsaas
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रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई
Kaifi Azmi
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ए'तिबार आता नहीं तो आज़मा के देख ले हम तेरे सब चाहने वालों में अव्वल आएँगे
Nadir Ariz
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मज़ा तो तब है कि तुम हार के भी हँसते रहो हमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़ी है
Parveen Shakir
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तुम ने एहसान किया था जो हमें चाहा था अब वो एहसान जता दो तो मज़ा आ जाए
Jaun Elia
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वतन की फ़िक्र कर नादाँ मुसीबत आने वाली है तेरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में
Allama Iqbal
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ढूँढ़ता फिरता हूँ मैं 'इक़बाल' अपने आप को आप ही गोया मुसाफ़िर आप ही मंज़िल हूँ मैं
Allama Iqbal
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हर इक मक़ाम से आगे मक़ाम है तेरा हयात ज़ौक़-ए-सफ़र के सिवा कुछ और नहीं
Allama Iqbal
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आँख जो कुछ देखती है लब पे आ सकता नहीं महव-ए-हैरत हूँ कि दुनिया क्या से क्या हो जाएगी
Allama Iqbal
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जीना वो क्या जो हो नफ़स-ए-ग़ैर पर मदार शोहरत की ज़िंदगी का भरोसा भी छोड़ दे
Allama Iqbal
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