पानी से क़तरे क़तरों से पानी जैसी ये सोच वैसा मआ'नी
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फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था
Adeem Hashmi
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मुझ को इस लफ़्ज़ का मतलब नहीं मालूम मगर आप की हम्म ने मुझे सोच में डाला हुआ है
Ammar Iqbal
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे? तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
Kumar Vishwas
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काम आया तिरंगा कफ़न के लिए कोई क़ुर्बां हुआ था वतन के लिए सोचो क्या कर लिया तुम ने जी कर के दोस्त नस भी काटी तो बस इक बदन के लिए
Neeraj Neer
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मुझ को मिली नहीं लड़की कोई उस सेे बेहतर जो बोल थी गई मुझ को यूँ डिज़र्व बेटर
Abhay Aadiv
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ज़िम्मेदारी जीने ही देती नहीं है ज़िंदगी भर जीनी पड़ती हैं बहुत सी ज़िंदगी इक ज़िंदगी में
Abhay Aadiv
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टूट कर बिखरने नईं दिया उस ने मुझे जोड़कर कुछ ऐसे ही रखा उस ने मुझे
Abhay Aadiv
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नदी के शांत तट पर बैठ जाऊँ और वो रावी की तरह बहती चली जाए पता है आज तुम को क्या हुआ 'आदिव' वो बोले और फिर कहती चली जाए
Abhay Aadiv
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वो रस्ते भी ज़िन्दगी को गए कुछ सिखा के जिस रस्ते से हम गुज़रना नहीं चाहते थे
Abhay Aadiv
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