पैदा हुए हैं बस, हम जैसे ख़ाली लोग और किया क्या है इस मिट्टी के ख़ातिर
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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उस का नाम सुनाई देने की वजह मेरे पड़ोस की छोटी बच्ची है दोस्त मेरे ख़यालों में ही पक्कापन है मेरी उम्र अभी भी कच्ची है दोस्त
Saahir
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इश्क़ दरख़्त है ऐसा जिस का साया तक भारी सर्दी में भी गर्मी देता है
Saahir
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पहले ही इश्क़ ने ये बताया मुझे छोड़ कर जाएगी आशिक़ी दर्द में मौत को कहते हैं सब बुरा दर्द क्यूँ कितना आराम है आख़िरी दर्द में
Saahir
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हर बदन से मैं वाकिफ़ हूँ अच्छे से दोस्त बस बदलती रही हैं तिलों की जगह
Saahir
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रोते-रोते सोए थे नहीं पता फिर किस का सर था किस के कंधे पर
Saahir
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