पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ था हर नग़्मा-ए-कृष्ण बाँसुरी का
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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किस ने दस्तक दी ये दिल पर कौन है आप तो अंदर हैं बाहर कौन है
Rahat Indori
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जौन' उठता है यूँँ कहो या'नी 'मीर'-ओ-'ग़ालिब' का यार उठता है
Jaun Elia
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अब उस जानिब से इस कसरत से तोहफ़े आ रहे हैं कि घर में हम नई अलमारियाँ बनवा रहे हैं
Tehzeeb Hafi
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शे'र दर-अस्ल हैं वही 'हसरत' सुनते ही दिल में जो उतर जाएँ
Hasrat Mohani
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देखो तो चश्म-ए-यार की जादू-निगाहियाँ बेहोश इक नज़र में हुई अंजुमन तमाम
Hasrat Mohani
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नहीं आती तो याद उन की महीनों तक नहीं आती मगर जब याद आते हैं तो अक्सर याद आते हैं
Hasrat Mohani
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हम क्या करें अगर न तिरी आरज़ू करें दुनिया में और भी कोई तेरे सिवा है क्या
Hasrat Mohani
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'हसरत' की भी क़ुबूल हो मथुरा में हाज़िरी सुनते हैं आशिक़ों पे तुम्हारा करम है आज
Hasrat Mohani
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