पहले जो कुछ किया था वही काम कर गई हम तो समझ रहे थे कि दुनिया सुधर गई
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे इक आग का दरिया है और डूब के जाना है
Jigar Moradabadi
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं दिल हमेशा उदास रहता है
Bashir Badr
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ज़िन्दगी भर यही इक काम किया है मैं ने अपने दुख दर्द को नीलाम किया है मैं ने जुर्म समझा है जिसे अहले-ख़िरद ने शादाब हाँ वही जुर्म सरे-आम किया है मैं ने
Shadab Shabbiri
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ज़माना तो उठाना चाहता है मैं पैर अपने जमाना चाहता हूँ
Shadab Shabbiri
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तुम वाह तो करते हो मगर तंज़ मिला कर हम आह भी करते हैं तो इक ख़ास तरह से
Shadab Shabbiri
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उस सेे मिल कर ख़ुशी हुई थी मुझे और फिर देर तक उदासी थी
Shadab Shabbiri
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यूँँ तो कोई भी बे-लिबास न था फिर भी लगता था बे-लिबासी थी उस से मिल कर ख़ुशी हुई थी मुझे और फिर देर तक उदासी थी
Shadab Shabbiri
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