पहले से अब गुल में ख़ुशबू ज़्यादा है या'नी मुझ में मैं कम और तू ज़्यादा है
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ज़ाया' किया है वक़्त जो आवारगी में शायद ही लौटेगा कभी वो ज़िन्दगी में इतना गुज़ारा वक़्त मैं ने रौशनी बिन लगने लगा अच्छा मुझे अब तीरगी में
Pushpendra Panchal
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ज़माने से ये कहने को कलेजा चाहिए जानाँ तुम्हारे बा'द भी तुम सेे मुहब्बत कर रहा हूँ मैं
Pushpendra Panchal
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वक़्त रोने में फ़क़त बर्बाद मत कर वो न आएगा उसे अब याद मत कर अब ख़ुदा भी हो गया लगता है पत्थर अब ख़ुदा से तू कोई फ़रियाद मत कर
Pushpendra Panchal
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तुम अकेली ही नहीं जो जा रही हो छोड़कर रूह भी तो छोड़ जाती है किसी दिन ये बदन
Pushpendra Panchal
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इस क़दर तल्ख़ी नहीं अच्छी मियाँ क़िरदार में हारने वाले ही अक्सर जीतते हैं प्यार में
Pushpendra Panchal
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