ज़माने से ये कहने को कलेजा चाहिए जानाँ तुम्हारे बा'द भी तुम सेे मुहब्बत कर रहा हूँ मैं
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तुम्हारे बिन गुज़ारी रात के बस दो ही क़िस्से हैं कभी हिचकी नहीं रुकती कभी सिसकी नहीं रुकती
Ankita Singh
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मैं किसी तरह भी समझौता नहीं कर सकता या तो सब कुछ ही मुझे चाहिए या कुछ भी नहीं
Jawwad Sheikh
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जा तुझे जाने दिया जानाँ मेरी जानाँ जान अब तू हो गई अनजान हो जैसे
nakul kumar
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आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
Ahmad Faraz
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हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं
Jigar Moradabadi
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ज़ाया' किया है वक़्त जो आवारगी में शायद ही लौटेगा कभी वो ज़िन्दगी में इतना गुज़ारा वक़्त मैं ने रौशनी बिन लगने लगा अच्छा मुझे अब तीरगी में
Pushpendra Panchal
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जात–मज़हब ये सियासी दायरे हैं हम नहीं आते तुम्हारे दायरे में
Pushpendra Panchal
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सितारा हूँ मैं अंबर का किसी दिन टूट भी जाऊँ करूँँ पूरी ये मुमकिन है तेरी मैं आख़िरी ख़्वाहिश
Pushpendra Panchal
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मैं ने पूछा तो मुहब्बत को इबादत ही कहा सबने अब अगर करने को कहता हूँ तो आख़िर क्यूँ नहीं करते
Pushpendra Panchal
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खा के चक्कर गिर गए थे कल सर-ए-बाज़ार में और तब से होश में हम आ न पाए आज तक
Pushpendra Panchal
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