मैं ने पूछा तो मुहब्बत को इबादत ही कहा सबने अब अगर करने को कहता हूँ तो आख़िर क्यूँ नहीं करते
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
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ज़ाया' किया है वक़्त जो आवारगी में शायद ही लौटेगा कभी वो ज़िन्दगी में इतना गुज़ारा वक़्त मैं ने रौशनी बिन लगने लगा अच्छा मुझे अब तीरगी में
Pushpendra Panchal
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जात–मज़हब ये सियासी दायरे हैं हम नहीं आते तुम्हारे दायरे में
Pushpendra Panchal
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तेरी हर इक शर्त मुझे मंज़ूर है लेकिन यूँँ मुझ को मेरे यार न तन्हा छोड़ा कर
Pushpendra Panchal
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तन्हाई ये नश्तर जैसी चुभती है आओ हम तुम फिर से झगड़ा करते है
Pushpendra Panchal
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उस का लहजा देखा तो ये समझा मैं मौसम पल में कैसे बदला करते हैं
Pushpendra Panchal
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