ज़ाया' किया है वक़्त जो आवारगी में शायद ही लौटेगा कभी वो ज़िन्दगी में इतना गुज़ारा वक़्त मैं ने रौशनी बिन लगने लगा अच्छा मुझे अब तीरगी में
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ज़माने से ये कहने को कलेजा चाहिए जानाँ तुम्हारे बा'द भी तुम सेे मुहब्बत कर रहा हूँ मैं
Pushpendra Panchal
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ये सबक़ देकर गया मुझ को गुज़िश्ता साल भी जाने वालों के लिए रोया नहीं करते मियाँ
Pushpendra Panchal
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उस का लहजा देखा तो ये समझा मैं मौसम पल में कैसे बदला करते हैं
Pushpendra Panchal
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मुझ को हीरा कह रहे हो पर न करता हूँ यक़ीं गर जो होता ये सही तो टूटता बिल्कुल नहीं
Pushpendra Panchal
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ख़ुशनुमा थी आप की पहले मियाँ ये ज़िंदगी आप कैसे आ गए इस इश्क़ के जंजाल में
Pushpendra Panchal
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