ये सबक़ देकर गया मुझ को गुज़िश्ता साल भी जाने वालों के लिए रोया नहीं करते मियाँ
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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ज़ाया' किया है वक़्त जो आवारगी में शायद ही लौटेगा कभी वो ज़िन्दगी में इतना गुज़ारा वक़्त मैं ने रौशनी बिन लगने लगा अच्छा मुझे अब तीरगी में
Pushpendra Panchal
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ज़माने से ये कहने को कलेजा चाहिए जानाँ तुम्हारे बा'द भी तुम सेे मुहब्बत कर रहा हूँ मैं
Pushpendra Panchal
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तन्हाई ये नश्तर जैसी चुभती है आओ हम तुम फिर से झगड़ा करते है
Pushpendra Panchal
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मुझ को हीरा कह रहे हो पर न करता हूँ यक़ीं गर जो होता ये सही तो टूटता बिल्कुल नहीं
Pushpendra Panchal
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उस का लहजा देखा तो ये समझा मैं मौसम पल में कैसे बदला करते हैं
Pushpendra Panchal
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