खा के चक्कर गिर गए थे कल सर-ए-बाज़ार में और तब से होश में हम आ न पाए आज तक
Related Sher
तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
1279 likes
हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
563 likes
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
594 likes
बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
751 likes
मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
140 likes
More from Pushpendra Panchal
ये सबक़ देकर गया मुझ को गुज़िश्ता साल भी जाने वालों के लिए रोया नहीं करते मियाँ
Pushpendra Panchal
0 likes
तेरी हर इक शर्त मुझे मंज़ूर है लेकिन यूँँ मुझ को मेरे यार न तन्हा छोड़ा कर
Pushpendra Panchal
0 likes
पहले से अब गुल में ख़ुशबू ज़्यादा है या'नी मुझ में मैं कम और तू ज़्यादा है
Pushpendra Panchal
0 likes
सियासत की बग़ावत के लिए हिम्मत कहाँ उन में बड़ी मुश्किल से मिलती है जिन्हें दो जून की रोटी
Pushpendra Panchal
0 likes
ख़ुशनुमा थी आप की पहले मियाँ ये ज़िंदगी आप कैसे आ गए इस इश्क़ के जंजाल में
Pushpendra Panchal
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Pushpendra Panchal.
Similar Moods
More moods that pair well with Pushpendra Panchal's sher.







