फैले हैं क़तरे ओस के घर में रोया हूँ मन मसोस के घर में मैं ने पलकें बिछाई थीं लेकिन चाँद उतरा पड़ोस के घर में
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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मुझ से दो दिन अलग रही है तू देख तो कैसी लग रही है तू हो गया राख जल के मैं लेकिन धीरे-धीरे सुलग रही है तू
Sandeep Thakur
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इस नदी की जवानी गिरवी है क्या बहेगी रवानी गिरवी है डूबी है बूँद-बूँद कर्ज़े में बाँध में सारा पानी गिरवी है
Sandeep Thakur
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आ के नज़दीक मुँह न फेर ग़ज़ल पास आ बैठ थोड़ी देर ग़ज़ल सब तेरे नूर से चमकते हैं लफ़्ज़ मिसरे ख़याल शे'र ग़ज़ल
Sandeep Thakur
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पाँव में खनकी चाँदी हो जैसे उस ने मुंडेर फाँदी हो जैसे छत पे दो पल मिलन जुदाई में धूप में बूँदा-बाँदी हो जैसे
Sandeep Thakur
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गुल सा तू तेरा साथ ख़ुशबू सा हाथ में तेरा हाथ ख़ुशबू सा हो के तुझ से जुदा भटकता हूँ गुल से बिछड़ी अनाथ ख़ुशबू सा
Sandeep Thakur
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