पिघल रहा है दुपहरी में यूँँ वो मोम बदन कहाँ कहाँ से न गुजरेगा पसीना हाए
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कभी घंटों पड़े रहते थे माँ की गोद में इस पर चलो माँ नाम रखते हैं विराट इस चारपाई का
Vishnu virat
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क़फ़स को तोड़ के जब भी असीर निकलेगा हमारे खोल के अंदर से मीर निकलेगा धुआँ है राख है और ढ़ेर है चिताओं का यहीं से नाचता गाता कबीर निकलेगा
Vishnu virat
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किसी ने प्यार जताया जता के छोड़ दिया हवा में मुझ को उठाया उठा के छोड़ दिया किसे सिखा रहे हो इश्क़ तुम नए लड़के ये राग हम ने मियाँ गा बजा के छोड़ दिया
Vishnu virat
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है उस बदन की लत मुझे सो दूसरा बदन अच्छा तो लग रहा है मेरे काम का नहीं
Vishnu virat
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मुहब्बत में पड़ा है एक जोगी वो लड़की अप्सरा जैसी ही होगी बने हम राम होगी रामलीला बताओ तुम वहाँ सीता बनोगी
Vishnu virat
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