क़फ़स को तोड़ के जब भी असीर निकलेगा हमारे खोल के अंदर से मीर निकलेगा धुआँ है राख है और ढ़ेर है चिताओं का यहीं से नाचता गाता कबीर निकलेगा
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बाग़बाँ हम तो इस ख़याल के हैं देख लो फूल फूल तोड़ो मत
Jaun Elia
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वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं
Mirza Ghalib
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सुख़न का जोश कम होता नहीं है वगरना क्या सितम होता नहीं है भले तुम काट दो बाज़ू हमारे क़लम का सर क़लम होता नहीं है
Baghi Vikas
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ज़माना चाहे जो आज कर ले नहीं रुकेंगे क़दम हमारे जिस आग से आफ़ताब रौशन वो आग दिल में धधक रही है
Amaan Pathan
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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कभी घंटों पड़े रहते थे माँ की गोद में इस पर चलो माँ नाम रखते हैं विराट इस चारपाई का
Vishnu virat
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तरीक़ा मिल ही जाएगा मुझे तुम तक पहुँचने का कि जैसे साँस ख़ुद सीने के रस्ता ढूँढ़ लेती है
Vishnu virat
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मुहब्बत में पड़ा है एक जोगी वो लड़की अप्सरा जैसी ही होगी बने हम राम होगी रामलीला बताओ तुम वहाँ सीता बनोगी
Vishnu virat
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किसी ने प्यार जताया जता के छोड़ दिया हवा में मुझ को उठाया उठा के छोड़ दिया किसे सिखा रहे हो इश्क़ तुम नए लड़के ये राग हम ने मियाँ गा बजा के छोड़ दिया
Vishnu virat
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पिघल रहा है दुपहरी में यूँँ वो मोम बदन कहाँ कहाँ से न गुजरेगा पसीना हाए
Vishnu virat
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