पिघलती है ये क़तरा क़तरा रंग अपना बदलती है तिरी गर्मी की जुंबिश से तमन्ना भी फिसलती है जवानी ख़त्म हो जाती है नादानी में जल जल के दिल-ए-नादाँ को बिल-आख़िर ये मिट्टी ही निगलती है
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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रक़ीबों ने कहा मुझ सेे दिखाओ रूम तुम अपना किताबें ग़म उदासी और इक फ़ोटो मिली उन को
Rohit Gustakh
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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और क्या चाहती है गर्दिश-ए-अय्याम कि हम अपना घर भूल गए उन की गली भूल गए
Jaun Elia
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या'नी कि इश्क़ अपना मुकम्मल नहीं हुआ गर मैं तुम्हारे हिज्र में पागल नहीं हुआ वो शख़्स सालों बा'द भी कितना हसीन है वो रंग कैनवस पे कभी डल नहीं हुआ
Kushal Dauneria
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ज़िन्दगी चल नज़र खोल के चल दिल में ईमान को घोल के चल दोस्त हर कोई फिर तेरा होगा प्यार से सब से तू बोल के चल
Sanjay Bhat
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वक़्त के तख़्त पर हम बिछे इस तरह ख़्वाब जो देखे थे ख़्वाब ही रह गए इन तरसती निगाहों में दिखता ही क्या आब-ए-ग़म बन के हम आँख से बह गए
Sanjay Bhat
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तेरे तेशे से गुज़र के है बनी ये मूरत चोट खा खा के बनी है ये चमकती सूरत
Sanjay Bhat
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ये रंगीन आँचल ये पुर नूर चेहरा खनक पायलों की ये चूड़ी का घेरा जहाँ तक भी देखो है ख़ुशबू तुम्हारी तुम्हारी चमक से है दिल में सवेरा
Sanjay Bhat
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साथ जिस के हो हर पल रवाँ शख़्स वो ही तो है दिलरुबा
Sanjay Bhat
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