वक़्त के तख़्त पर हम बिछे इस तरह ख़्वाब जो देखे थे ख़्वाब ही रह गए इन तरसती निगाहों में दिखता ही क्या आब-ए-ग़म बन के हम आँख से बह गए
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कोई चादर वफ़ा नहीं करती वक़्त जब खींच-तान करता है
Unknown
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आज पलटे जो ख़्बाब के पन्ने मैं ने दिल की किताब के पन्ने वक़्त ने देख मोड़ रक्खे हैं तेरे हुस्नो शबाब के पन्ने
Sandeep Thakur
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एक मुझे ख़्वाब देखने के सिवा चाय पीने की गंदी आदत है
Balmohan Pandey
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ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
Jaun Elia
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अब उदास फिरते हो सर्दियों की शामों में इस तरह तो होता है इस तरह के कामों में
Shoaib Bin Aziz
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किस तरह पूछूँ वो कहाँ है कैसा है अब माँ की बातें शोर लगती हैं उसे
Sanjay Bhat
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कहाँ ऐसे मरासिम थे कि कोई लौट के आता ख़िज़ाँ के फूल को ख़ूँ की नहीं अश्कों की हाजत थी
Sanjay Bhat
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ये रंगीन आँचल ये पुर नूर चेहरा खनक पायलों की ये चूड़ी का घेरा जहाँ तक भी देखो है ख़ुशबू तुम्हारी तुम्हारी चमक से है दिल में सवेरा
Sanjay Bhat
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वो दिल से हो कर आँख से उतर गया इक आँसू था जो उम्र से गुज़र गया
Sanjay Bhat
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वक़्त का राह से बस यही अहद था ये कि हम को गुज़र के गुज़रना पड़ा
Sanjay Bhat
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