राह-ए-दूर-ए-इश्क़ में रोता है क्या आगे आगे देखिए होता है क्या
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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शाम से कुछ बुझा सा रहता हूँ दिल हुआ है चराग़ मुफ़्लिस का
Meer Taqi Meer
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फूल गुल शम्स-ओ-क़मर सारे ही थे पर हमें उन में तुम्हीं भाए बहुत
Meer Taqi Meer
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वस्ल में रंग उड़ गया मेरा क्या जुदाई को मुँह दिखाऊँगा
Meer Taqi Meer
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इश्क़ इक 'मीर' भारी पत्थर है कब ये तुझ ना-तवाँ से उठता है
Meer Taqi Meer
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ओहदे से निकलें किस तरह आशिक़ एक अदा उस की है हज़ार-फ़रेब
Meer Taqi Meer
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