रात तेरे बा'द कैसे काटता हिज्र में तो कट गई है ज़िंदगी
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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पता होता तो ऐसा भी मैं कर जाता कभी वापस नहीं अपने मैं घर जाता मोहब्बत ने नया पागल बनाया था सही होता अलग हो कर मैं मर जाता
Mohammad Bilal
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वक़्त जब तक सही नहीं होता कोई हँस कर गले नहीं लगता
Mohammad Bilal
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पास रहने को तो घर भी है मगर तेरे दिल में रहना अच्छा लगता है
Mohammad Bilal
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तिरे ही साथ रह कर मैं ने देखा था तिरे कानों में झुमके अच्छे लगते हैं
Mohammad Bilal
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मिरी साथी रही होगी कभी वरना उसे तोहफ़े में अपना दिल नहीं देता
Mohammad Bilal
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