वक़्त जब तक सही नहीं होता कोई हँस कर गले नहीं लगता
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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पता होता तो ऐसा भी मैं कर जाता कभी वापस नहीं अपने मैं घर जाता मोहब्बत ने नया पागल बनाया था सही होता अलग हो कर मैं मर जाता
Mohammad Bilal
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अभी देखा गया है चाँद बिल्कुल तिरे जैसा बताया जा रहा है
Mohammad Bilal
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पास रहने को तो घर भी है मगर तेरे दिल में रहना अच्छा लगता है
Mohammad Bilal
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चलो हम आज दोनों दीद करते हैं गले मिल कर कहीं हम ईद करते हैं
Mohammad Bilal
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आप जब भी आएँगे पहले जैसा पाएँगे आप को बस देख कर हम यूँँ ही मर जाएँगे
Mohammad Bilal
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