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रेत को मुट्ठी में भर कर तय करें मीलों सफ़र इस तरह ख़ुशियाँ पहुँचती हैँ यहाँ आवाम तक

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ज़िन्दगी का नहीं था जब मक़सद मौत का इंतिज़ार था मुझ को

Dharamraj deshraj

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ज़िन्दगी तू आज़माना छोड़ दे मौत से कह दे बहाना छोड़ दे फूँकने के काम वो आता मकाँ जब परिंदा आशियाना छोड़ दे यार क़िस्मत से भी भागा है कोई बे-सबब आँसू बहाना छोड़ दे छोड़ दूँ उस की गली उस का नगर वो मिरे ख़्वाबों में आना छोड़ दे यार तू माता-पिता को रब समझ हर कहीं भी सर झुकाना छोड़ दे फूल के बदले जहाँ काँटे मिलें ऐसे तू रिश्ते निभाना छोड़ दे चाँद पाने के लिए नादाँ 'धरम' हो सके तो कसमसाना छोड़ दे

Dharamraj deshraj

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वो तेरा नींद में हँसना भी इक क़यामत है कभी तो ख़्वाब में हम को भी तू बुलाया कर

Dharamraj deshraj

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लोग भूलेंगे मुहब्बत जिस दिन बस उसी रोज़ क़यामत होगी

Dharamraj deshraj

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वक़्त के बन ग़ुलाम हम सारे नक़्शे-पा अपने छोड़ जाते हैं

Dharamraj deshraj

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