वक़्त के बन ग़ुलाम हम सारे नक़्शे-पा अपने छोड़ जाते हैं
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जब भी उस की गली में भ्रमण होता है उस के द्वार पर आत्मसमर्पण होता है किस किस से तुम दोष छुपाओगे अपने प्रिये अपना मन भी दर्पण होता है
Azhar Iqbal
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निगाहों के तक़ाज़े चैन से मरने नहीं देते यहाँ मंज़र ही ऐसे हैं कि दिल भरने नहीं देते हमीं उन से उमीदें आसमाँ छूने की करते हैं हमीं बच्चों को अपने फ़ैसले करने नहीं देते
Waseem Barelvi
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अपने सामान को बाँधे हुए इस सोच में हूँ जो कहीं के नहीं रहते वो कहाँ जाते हैं
Jawwad Sheikh
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अब उस सेे दोस्ती है जिस सेे कल मुहब्बत थी अब इस सेे ज़्यादा बुरा वक़्त कुछ नहीं है दोस्त
Vishal Singh Tabish
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प्यार मेरी कमज़ोरी थी और उस ने मुझे जी भर कर कमज़ोर किया फिर छोड़ दिया
Varun Anand
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ज़िन्दगी का नहीं था जब मक़सद मौत का इंतिज़ार था मुझ को
Dharamraj deshraj
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समय हाथों से निकला जा रहा है परिंदा वक़्त का समझा रहा है मुसाफ़िर की तरह हम सब यहाँ हैं कोई आया तो कोई जा रहा है अभी भी वक़्त है यारो सँभलिए समय अब आईना दिखला रहा है जहाँ इंसान भी गायब मिलेगा अभी बस वो ज़माना आ रहा है जरा सोचो कि ईमाँ जब न होगा अभी तो आदमी इतरा रहा है सलीक़े से हमें रहना ही होगा भले मौसम हमें भटका रहा है 'धरम' अब तो बुराई छोड़ भी दे जो दानिशमंद है समझा रहा है
Dharamraj deshraj
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ज़िन्दगी तू आज़माना छोड़ दे मौत से कह दे बहाना छोड़ दे फूँकने के काम वो आता मकाँ जब परिंदा आशियाना छोड़ दे यार क़िस्मत से भी भागा है कोई बे-सबब आँसू बहाना छोड़ दे छोड़ दूँ उस की गली उस का नगर वो मिरे ख़्वाबों में आना छोड़ दे यार तू माता-पिता को रब समझ हर कहीं भी सर झुकाना छोड़ दे फूल के बदले जहाँ काँटे मिलें ऐसे तू रिश्ते निभाना छोड़ दे चाँद पाने के लिए नादाँ 'धरम' हो सके तो कसमसाना छोड़ दे
Dharamraj deshraj
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वो तेरा नींद में हँसना भी इक क़यामत है कभी तो ख़्वाब में हम को भी तू बुलाया कर
Dharamraj deshraj
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लोग भूलेंगे मुहब्बत जिस दिन बस उसी रोज़ क़यामत होगी
Dharamraj deshraj
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