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लोग भूलेंगे मुहब्बत जिस दिन बस उसी रोज़ क़यामत होगी

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वक़्त के बन ग़ुलाम हम सारे नक़्शे-पा अपने छोड़ जाते हैं

Dharamraj deshraj

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ज़िन्दगी का नहीं था जब मक़सद मौत का इंतिज़ार था मुझ को

Dharamraj deshraj

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जिस के सीने में मुहब्बत का ख़ज़ाना होगा ऐसे इंसान की ठोकर में ज़माना होगा।

Dharamraj deshraj

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ज़िन्दगी तू आज़माना छोड़ दे मौत से कह दे बहाना छोड़ दे फूँकने के काम वो आता मकाँ जब परिंदा आशियाना छोड़ दे यार क़िस्मत से भी भागा है कोई बे-सबब आँसू बहाना छोड़ दे छोड़ दूँ उस की गली उस का नगर वो मिरे ख़्वाबों में आना छोड़ दे यार तू माता-पिता को रब समझ हर कहीं भी सर झुकाना छोड़ दे फूल के बदले जहाँ काँटे मिलें ऐसे तू रिश्ते निभाना छोड़ दे चाँद पाने के लिए नादाँ 'धरम' हो सके तो कसमसाना छोड़ दे

Dharamraj deshraj

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देना ही है जो कुछ तो उसे ज़ख़्म दीजिये एहसान भूल जाएगा कम्बख़्त आदमी

Dharamraj deshraj

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