जिस के सीने में मुहब्बत का ख़ज़ाना होगा ऐसे इंसान की ठोकर में ज़माना होगा।
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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ज़िन्दगी तू आज़माना छोड़ दे मौत से कह दे बहाना छोड़ दे फूँकने के काम वो आता मकाँ जब परिंदा आशियाना छोड़ दे यार क़िस्मत से भी भागा है कोई बे-सबब आँसू बहाना छोड़ दे छोड़ दूँ उस की गली उस का नगर वो मिरे ख़्वाबों में आना छोड़ दे यार तू माता-पिता को रब समझ हर कहीं भी सर झुकाना छोड़ दे फूल के बदले जहाँ काँटे मिलें ऐसे तू रिश्ते निभाना छोड़ दे चाँद पाने के लिए नादाँ 'धरम' हो सके तो कसमसाना छोड़ दे
Dharamraj deshraj
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समय हाथों से निकला जा रहा है परिंदा वक़्त का समझा रहा है मुसाफ़िर की तरह हम सब यहाँ हैं कोई आया तो कोई जा रहा है अभी भी वक़्त है यारो सँभलिए समय अब आईना दिखला रहा है जहाँ इंसान भी गायब मिलेगा अभी बस वो ज़माना आ रहा है जरा सोचो कि ईमाँ जब न होगा अभी तो आदमी इतरा रहा है सलीक़े से हमें रहना ही होगा भले मौसम हमें भटका रहा है 'धरम' अब तो बुराई छोड़ भी दे जो दानिशमंद है समझा रहा है
Dharamraj deshraj
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किस ने दिया है दर्द हमें कुछ पता नहीं इतना पता है दर्द हमारा है हिचकियाँ
Dharamraj deshraj
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वो तेरा नींद में हँसना भी इक क़यामत है कभी तो ख़्वाब में हम को भी तू बुलाया कर
Dharamraj deshraj
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ज़िन्दगी का नहीं था जब मक़सद मौत का इंतिज़ार था मुझ को
Dharamraj deshraj
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