किस ने दिया है दर्द हमें कुछ पता नहीं इतना पता है दर्द हमारा है हिचकियाँ
Related Sher
तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
1279 likes
कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
164 likes
शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
839 likes
ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
174 likes
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
594 likes
More from Dharamraj deshraj
ज़िन्दगी तू आज़माना छोड़ दे मौत से कह दे बहाना छोड़ दे फूँकने के काम वो आता मकाँ जब परिंदा आशियाना छोड़ दे यार क़िस्मत से भी भागा है कोई बे-सबब आँसू बहाना छोड़ दे छोड़ दूँ उस की गली उस का नगर वो मिरे ख़्वाबों में आना छोड़ दे यार तू माता-पिता को रब समझ हर कहीं भी सर झुकाना छोड़ दे फूल के बदले जहाँ काँटे मिलें ऐसे तू रिश्ते निभाना छोड़ दे चाँद पाने के लिए नादाँ 'धरम' हो सके तो कसमसाना छोड़ दे
Dharamraj deshraj
1 likes
वो तेरा नींद में हँसना भी इक क़यामत है कभी तो ख़्वाब में हम को भी तू बुलाया कर
Dharamraj deshraj
2 likes
रेत को मुट्ठी में भर कर तय करें मीलों सफ़र इस तरह ख़ुशियाँ पहुँचती हैँ यहाँ आवाम तक
Dharamraj deshraj
2 likes
समय हाथों से निकला जा रहा है परिंदा वक़्त का समझा रहा है मुसाफ़िर की तरह हम सब यहाँ हैं कोई आया तो कोई जा रहा है अभी भी वक़्त है यारो सँभलिए समय अब आईना दिखला रहा है जहाँ इंसान भी गायब मिलेगा अभी बस वो ज़माना आ रहा है जरा सोचो कि ईमाँ जब न होगा अभी तो आदमी इतरा रहा है सलीक़े से हमें रहना ही होगा भले मौसम हमें भटका रहा है 'धरम' अब तो बुराई छोड़ भी दे जो दानिशमंद है समझा रहा है
Dharamraj deshraj
2 likes
यूँँ भी किया गया है मिरे दर्द का इलाज़ काँटे चुभा-चुभाके तलाशा है दर्द को
Dharamraj deshraj
4 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Dharamraj deshraj.
Similar Moods
More moods that pair well with Dharamraj deshraj's sher.







