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रंग लाल और इक अदा-ए-ख़ास चेहरा जी रहा है देख कर जिसे उदास चेहरा क्यूँ करें ग़मो का ज़िक्र अब किसी के पास हम साथ है मिरे जो एक ग़म शनास चेहरा

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अगर ये आख़री है ईद तो ख़ुदा मुझ को गले लगाए वो और ईद ये मुबारक हो

Kumar gyaneshwar

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देखो इतना भी ये आसान नहीं होता है ग़म हो तो कौन परेशान नहीं होता है इश्क़ में ख़ुद-कुशी करने जा रहे ऐ लड़के तुम तो कहते थे कि नुक़सान नहीं होता है

Kumar gyaneshwar

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वफ़ा की बात पर इतनी शिकायत कौन करता है न जाने इन गुलाबों से मोहब्बत कौन करता है हमारे साथ रह कर तुम भी इतना सीख जाओगे पुरानी याद की आख़िर हिफाज़त कौन करता है।

Kumar gyaneshwar

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कोई इस दर्जा न हो आसान मुझ पर यूँँ लगे अब हो रहा एहसान मुझ पर एक रिश्ता एक वा'दा एक लड़की बस हुआ इतनों का ही नुक़्सान मुझ पर

Kumar gyaneshwar

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दुआएँ देता है पर मसअले का हल नहीं करता मैं और करता भी क्या ख़ुद को अगर पागल नहीं करता मोहब्बत भी नहीं मिलती न दिल ये टूटता ही है ख़ुदा मुझ को किसी भी काम में अव्वल नहीं करता

Kumar gyaneshwar

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