रज़ा उस की समझ में आ गई है मुझे भी ये कहानी भा गई है किसी का दिन नहीं चढ़ता ज़मीं पर किसी की रात नभ पर छा गई है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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यहाँ भी मैं तिरा दीदार करने की ख़ुशी में मिटा दूँगा अभी ये रार मरने की ख़ुशी में
Vishakt ki Kalam se
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यहाँ आगे किसी की भी निशानी तो नहीं है कहीं ये वो अधूरी सी कहानी तो नहीं है
Vishakt ki Kalam se
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तुम किसी की ख़्वाहिशों को ख़्वाब मेरे से न तोलो बोल सकते हो हक़ीक़त तो ख़ुशी से आज बोलो
Vishakt ki Kalam se
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मुझे इक काम है तुम से करोगे तो बताओ तुम तुम्हें जब नींद आ जाए पता देना उसे मेरा
Vishakt ki Kalam se
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उदासी को छिपाना जानता हूँ कभी रोया नहीं मैं भी अभी तक
Vishakt ki Kalam se
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