रूह सारी सर-ख़ुशी से छोड़ती सारे बदन सोगवारी बेवजह सारी यहाँ घर घर चले
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
Tehzeeb Hafi
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मुझ को बदन नसीब था पर रूह के बग़ैर उस ने दिया भी फूल तो ख़ुशबू निकाल कर
Ankit Maurya
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यहाँ चेहरे सभी जैसे भरी ‘कालिख़’ बचे कुछ साफ़ उन में रंग भरने दो
Saurabh Yadav Kaalikhh
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थे बहुत शाही से उस के शौक़ मैं क्या बोलता जान को पिस्ता खिलाने में यहाँ पिसता रहा
Saurabh Yadav Kaalikhh
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तीरगी थी रास्तों में और भटका मैं बहुत रौशनी पाई गुरू से जब कभी गिरता रहा
Saurabh Yadav Kaalikhh
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याद में मेरी जो शख़्स था याद सा ही मिला है मुझे
Saurabh Yadav Kaalikhh
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ज़ख़्मी से दिन हैं आजकल 'कालिख़' यहाँ तुम याद जाने इस क़दर क्यूँँ आ रहे
Saurabh Yadav Kaalikhh
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