रुख़ हवा का भी मोड़ देती है क़ैद ज़ुल्फ़ें जो छोड़ देती है आशिक़ो की उस को कमी कब है दो मिनट में दिल तोड़ देती है
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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बो देता है ख़्वाहिश फिर रोता है सातों दिन अपना मन ही हर ग़म का गहवारा होता है
nakul kumar
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तू ने देखी है वो पेशानी वो रुख़्सार वो होंठ ज़िंदगी जिन के तसव्वुर में लुटा दी हम ने तुझ पे उठी हैं वो खोई हुई साहिर आँखें तुझ को मालूम है क्यूँ उम्र गँवा दी हम ने
Faiz Ahmad Faiz
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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करती है तो करने दे हवाओं को शरारत मौसम का तकाज़ा है कि बालों को खुला छोड़
Abrar Kashif
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ज़ौक़-ए-मोहब्बत चख लिया हम ने और जानने को कुछ नहीं है अब
Manoj Devdutt
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वक़्त जब जाने का आया है तब मुझे उस ने बुलाया है
Manoj Devdutt
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तेरे नज़दीक आ कर सोचता हूँ हक़ीक़त है या कोई ख़्वाब है ये
Manoj Devdutt
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सिलसिला ये हम कभी रुकने नहीं देंगे ख़ुद के होते हम तुझे झुकने नहीं देंगे
Manoj Devdutt
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उस ने जब से हम दोनों को जुदा किया है फिर कब मैं ने उस पत्थर को ख़ुदा किया है उस को नावों की सवारी अच्छी लगती थी बस उस के ख़ातिर ख़ुद को नाख़ुदा किया है
Manoj Devdutt
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