सादे काग़ज़ जैसा जीवन जीवन जैसा नइँ होता कुछ न सही तो टेढ़ी मेढ़ी खींच लकीरें काग़ज़ पर
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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राम कथा में जाने वाले लाखों लोग राम के जैसा बनने वाला एक नहीं
Tanoj Dadhich
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मत बताना कि बिखर जाएँ तो क्या होता है नईं नस्लों को नए ख़्वाब सजाने देना
Ameer Imam
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क़ीमती स्याही भरी जिस जिस क़लम में आँसुओं की वक़्त पे वो भूल बैठे ये ग़लत ये ठीक सा है बोलते थे बोल जो ता'रीफ़ में हर रोज़ मेरी एक दिन वो बोल बैठे आप की ता'रीफ़ क्या है
Anmol Mishra
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ख़ामोशियाँ ग़ुलाम बनाती हैं शोर को शब इश्क़ के उसूल सिखाती चकोर को दिन भर तो मेरे यार मेरे यार थे बहुत पर शाम को गया जो वो लौटा न भोर को
Anmol Mishra
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जो जो जितना पास था मेरे वो वो उतना दूर हुआ उस सेे कहा इक छोटा क़िस्सा अगले ही दिन मशहूर हुआ किसी सहारे की चाहत में जब जब टूटे रातों को ख़ुद के कंधे पर सिर रखना फिर रोना मंज़ूर हुआ
Anmol Mishra
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धुएँ की चाह में पागल हरी पत्ती जलाते हो समझ पाए न इल्मों को तो तुम पुस्ती जलाते हो बहुत नादान हो तुम भी तुम्हारी हरकतें क्या कम उजाले को मिटाने के लिए बत्ती जलाते हो
Anmol Mishra
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तमाम रातें सुकून सारा चुरा के जानाँ कहाँँ को चल दी सुनो शब-ए-वस्ल है हमारी जगा के जानाँ कहाँँ को चल दी हमारे पैरों पे पैर रख के खड़ी हुई थी गले लगाने तुम्हारे पैरों लगी महावर लगा के जानाँ कहाँँ को चल दी
Anmol Mishra
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