साल भर पढ़ते रहे बस पाई, थीटा दुख ग़रीबी का मिटाने के लिए हम
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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मैं चाहता था मुझ सेे बिछड़ कर वो ख़ुश रहे लेकिन वो ख़ुश हुआ तो बड़ा दुख हुआ मुझे
Umair Najmi
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है दुख तो कह दो किसी पेड़ से परिंदे से अब आदमी का भरोसा नहीं है प्यारे कोई
Madan Mohan Danish
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यूँँ तो जान चला जाता हूँ तुझ सेे दूर मगर इस दिल से तेरी बातों का जाल नहीं जाता
Govind kumar
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सब के सब अपने ख़ुशी, ग़म हार जाता है जब कोई इस ओर से उस पार जाता है
Govind kumar
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पहले पर्दा करता है फिर बे-क़रारी करता है इस क़दर हम सेे मुहब्बत यार जारी करता है
Govind kumar
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ज़िंदगी अच्छे से जीने का तरीक़ा आ गया जब से चुप रहने का, सुनने का सलीक़ा आ गया
Govind kumar
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मैं कोई और था कहानी में कोई और था यार तेरी ज़िंदगानी में कोई और था
Govind kumar
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