सब के सब अपने ख़ुशी, ग़म हार जाता है जब कोई इस ओर से उस पार जाता है
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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मुझे आज़ाद कर दो एक दिन सब सच बता कर तुम्हारे और उस के दरमियाँ क्या चल रहा है
Tehzeeb Hafi
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कौन तुम्हारे पास से उठ कर घर जाता है तुम जिस को छू लेती हो वो मर जाता है
Tehzeeb Hafi
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मेरे नाम से क्या मतलब है तुम्हें मिट जाएगा या रह जाता है जब तुम ने ही साथ नहीं रहना फिर पीछे क्या रह जाता है मेरे पास आने तक और किसी की याद उसे खा जाती है वो मुझ तक कम ही पहुँचता है किसी और जगह रह जाता है
Tehzeeb Hafi
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ज़िक्र तिरा अब भी बेकार नहीं जाता हम टूट जाते हैं बस नज़र नहीं आता
Govind kumar
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पहले पर्दा करता है फिर बे-क़रारी करता है इस क़दर हम सेे मुहब्बत यार जारी करता है
Govind kumar
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सामने तू थी तो मेरी हार तय थी किस लिए फिर जंग में लश्कर बनाते
Govind kumar
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वक़्त रहते तुझे बताना था हम को तेरे क़रीब आना था
Govind kumar
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आँख से जब पानी बहता है दिल तब जाके सच कहता है अपना दिल भी है कैसा दिल हर पल बस रोता रहता है
Govind kumar
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