ज़िक्र तिरा अब भी बेकार नहीं जाता हम टूट जाते हैं बस नज़र नहीं आता
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ज़िंदगी अच्छे से जीने का तरीक़ा आ गया जब से चुप रहने का, सुनने का सलीक़ा आ गया
Govind kumar
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पूछ सकते हैं आप अब कुछ भी काम आ जाए बात कब कुछ भी बात दिल की करें भी तो कैसे पास अपने नहीं है जब कुछ भी
Govind kumar
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था क़ाबू जब तक दिल पे मेरा तुझ सेे प्यार किया अब मेरी क्या ग़लती तू ने ही दिल पे वार किया
Govind kumar
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ज़िंदा-दिल लोग भी ऐसे में रोते हैं जब किसी अपने को वो कहीं खोते हैं
Govind kumar
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सब के सब अपने ख़ुशी, ग़म हार जाता है जब कोई इस ओर से उस पार जाता है
Govind kumar
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