ज़िंदगी अच्छे से जीने का तरीक़ा आ गया जब से चुप रहने का, सुनने का सलीक़ा आ गया
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कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यूँँ लगते हो
Mohsin Naqvi
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वो ज़माना गुज़र गया कब का था जो दीवाना मर गया कब का
Javed Akhtar
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में
Fahmi Badayuni
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तेरे बिन दिल उदास रहता है इस लिए तेरे पास रहता है
Govind kumar
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गाड़ी अपनी थी पर सामान पराया था या'नी इस चोरी में नुक़सान पराया था
Govind kumar
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ज़िंदा-दिल लोग भी ऐसे में रोते हैं जब किसी अपने को वो कहीं खोते हैं
Govind kumar
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पूछ सकते हैं आप अब कुछ भी काम आ जाए बात कब कुछ भी बात दिल की करें भी तो कैसे पास अपने नहीं है जब कुछ भी
Govind kumar
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कमाई इक नहीं ख़र्चा हज़ारों का बहुत मुश्किल यहाँ पे घर चलाना है
Govind kumar
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