साँस दर साँस पुर-अज़ीयत है ज़िंदगी क़ैद-ए-बामशक़्क़त है
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ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
Jaun Elia
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हम हैं ना! ये जो मुझ सेे कहते हैं ख़ुद किसी और के भरोसे हैं ज़िंदगी के लिए बताओ कुछ ख़ुद-कुशी के तो सौ तरीक़े हैं
Vikram Gaur Vairagi
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
Tehzeeb Hafi
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तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
Fauziya Rabab
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ये जो रौनक़ है मेरे चेहरे पर ये मेरे ग़म का कार-नामा है
Ramnath Shodharthi
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तुम्हें जन्नत में होना चाहिए था जहन्नुम में भला क्या कर रहे हो
Ramnath Shodharthi
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तुम्हारी आँखों को देखा तो ये यक़ीन हुआ बग़ैर लफ़्ज़ के भी बात-चीत मुमकिन है
Ramnath Shodharthi
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शे'र में और कुछ भले ही न हो शे'र में शा'इरी ज़रूरी है
Ramnath Shodharthi
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तुम तो किसी भी बात पे कुछ बोलते नहीं मैं कम ही बोलता हूँ मगर बोलता तो हूँ
Ramnath Shodharthi
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