तुम्हारी आँखों को देखा तो ये यक़ीन हुआ बग़ैर लफ़्ज़ के भी बात-चीत मुमकिन है
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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मैं चाहता था मुझ सेे बिछड़ कर वो ख़ुश रहे लेकिन वो ख़ुश हुआ तो बड़ा दुख हुआ मुझे
Umair Najmi
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वो जिस पर उस की रहमत हो वो दौलत माँगता है क्या मोहब्बत करने वाला दिल मोहब्बत माँगते है क्या तुम्हारा दिल कहे जब भी उजाला बन के आ जाना कभी उगता हुआ सूरज इजाज़त माँगता है क्या
Ankita Singh
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यही तो ज़िंदगी की ख़ूबसूरती है मियाँ किसी को इल्म नहीं कल यहाँ पे क्या होगा
Ramnath Shodharthi
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तुम्हें जन्नत में होना चाहिए था जहन्नुम में भला क्या कर रहे हो
Ramnath Shodharthi
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तुम तो किसी भी बात पे कुछ बोलते नहीं मैं कम ही बोलता हूँ मगर बोलता तो हूँ
Ramnath Shodharthi
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साँस दर साँस पुर-अज़ीयत है ज़िंदगी क़ैद-ए-बामशक़्क़त है
Ramnath Shodharthi
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रोटियां फेंकते हो रोटियों की क़द्र करो एक रोटी के लिए क़त्ल भी हो जाता है
Ramnath Shodharthi
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