सारे ख़्वाब उसी के थे मेरी तो बस आँखें थीं मुझ में सुब्ह उसी से थे पहले अँधेरी रातें थी
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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एक दिन की ख़ुराक है मेरी आप के हैं जो पूरे साल के दुख
Varun Anand
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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
Ahmad Faraz
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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उन को लगता है सब तमाशा है वो मोहब्बत जो बे-तहाशा है
Afzal Sultanpuri
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मोहब्बत में लिया था लोन मैं ने वही किश्तें मुसलसल भर रहा हूँ
Afzal Sultanpuri
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अपनी मय्यत उठा नहीं सकता चार कंधों की अब ज़रूरत है
Afzal Sultanpuri
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ज़मीं भी पाक हो गई थी क़दम जब आप के पड़े थे
Afzal Sultanpuri
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तेरे दर पर सवाली आ गया है मगर ये हाथ ख़ाली आ गया है
Afzal Sultanpuri
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