सब-के-सब तेरे ही तो बंदे हैं इक बराबर दे बांटने वाले
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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सुना जब से कभी हम भी थे मछली मोहब्बत हो गई 'माहिर' नदी से
Vijay Anand Mahir
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ख़ुशी तो बस ज़रा सी रह गई है उदासी ही उदासी रह गई है बदन की प्यास सारी मिट गई पर हमारी रूह प्यासी रह गई है
Vijay Anand Mahir
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एक दिन उस का जाना तय ही था याद हम ने नहीं किया नंबर
Vijay Anand Mahir
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एक दिन इश्क़ को भी काटेंगे इश्क़ में हाथ काटने वाले
Vijay Anand Mahir
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जब देखे मैं ने बेचारे पत्थर आँखों से निकले तब खारे पत्थर
Vijay Anand Mahir
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