ख़ुशी तो बस ज़रा सी रह गई है उदासी ही उदासी रह गई है बदन की प्यास सारी मिट गई पर हमारी रूह प्यासी रह गई है
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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मेरे अंदर से आ जाओ बाहर गहमा-गहमी है एक बदन में दो लोगों को कैसे घर ले जाऊँगा
nakul kumar
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ज़िंदगी भर वो उदासी के लिए काफ़ी है एक तस्वीर जो हँसते हुए खिंचवाई थी
Yasir Khan
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सारी रात लगाकर उसपर नज़्म लिखी और उस ने बस अच्छा लिखकर भेजा है
Zahid Bashir
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सुना जब से कभी हम भी थे मछली मोहब्बत हो गई 'माहिर' नदी से
Vijay Anand Mahir
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मिले तो पूछना यारों ख़ुदा से वफ़ा होती नहीं क्यूँँ आदमी से
Vijay Anand Mahir
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एक दिन इश्क़ को भी काटेंगे इश्क़ में हाथ काटने वाले
Vijay Anand Mahir
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वक़्त ने कुछ ऐसा घेरा क्या करें मन बहुत था तेरा मेरा क्या करें
Vijay Anand Mahir
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तुम सेे मिल कर हम ने जाना दिल तोड़ा भी जा सकता है
Vijay Anand Mahir
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