सभी भगवान बाहर आ रहे हैं नहीं इंसान ढूढ़ें अब मिलेंगे
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
Jaun Elia
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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ज़िन्दगी जीने का मतलब कुछ नहीं पर मौत भी मर्ज़ी से तो आती नहीं है
Umesh Maurya
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ज़ंजीरें तो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है इन्सानों की ही अदला बदली होती है
Umesh Maurya
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वो जब आता था सारा घर ही भर जाता था ख़ुशियों से अकेला शख़्स ही सारे ग़मों को सोख लेता था
Umesh Maurya
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जिस्म तो बेचे ख़रीदे जा रहे हैं आवरण रिश्तों रिवाज़ों के चढ़ाकर
Umesh Maurya
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ज़मीं का जल कभी बादल रहा है तमाशा ज़िन्दगी का चल रहा है
Umesh Maurya
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