ज़ंजीरें तो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है इन्सानों की ही अदला बदली होती है
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न जाने कैसी महरूमी पस-ए-रफ़्तार चलती है हमेशा मेरे आगे आगे इक दीवार चलती है
Aziz Nabeel
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अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है
Munawwar Rana
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ये रीत तो चलती रहेगी आशिक़ी में मौत की आशिक़ तो होंगे और भी फिर तेरे दीवाने के बा'द
Amaan Pathan
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हुआ है ज़िक्र मक्ते में कहीं पर नाम का तेरे दिखा है अक्स तारों में क़लम रातों में चलती है
Kanha Mohit
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बात तो जब है कि अंगारों पे चल कर देखे आरज़ू फूलों पे चलती है तो क्या चलती है
Dharmesh bashar
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ज़िन्दगी जीने का मतलब कुछ नहीं पर मौत भी मर्ज़ी से तो आती नहीं है
Umesh Maurya
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थी नदी गहरी बहुत, तूफ़ान भी था कौन टूटी नाव पर करता सवारी
Umesh Maurya
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सभी का इश्क़ सच्चा तो नहीं है बहुत से लोग अभिनय कर रहे हैं
Umesh Maurya
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सभी भगवान बाहर आ रहे हैं नहीं इंसान ढूढ़ें अब मिलेंगे
Umesh Maurya
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जिस्म तो बेचे ख़रीदे जा रहे हैं आवरण रिश्तों रिवाज़ों के चढ़ाकर
Umesh Maurya
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