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हुआ है ज़िक्र मक्ते में कहीं पर नाम का तेरे दिखा है अक्स तारों में क़लम रातों में चलती है

Kanha Mohit10 Likes

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सजदे करो लाखों मगर मालूम है ना इश्क़ है गर मिल गए तो ठीक वरना जानलेवा इश्क़ है संगम के पानी की तरह तुम सेे मेरा दिल मिल गया ये जान कर भी सोचती हो क्या भरोसा इश्क़ है पूछा किसी ने माँ से चुप कब से है तेरा लाडला कहने लगी जिस दिन मुझे इसने कहा था इश्क़ है मन्नत से शायद अपको जन्नत तो मिल भी सकती है पर वो मिलेगा जब उसे एहसास होगा इश्क़ है शिद्दत जुनूँ दीवानगी काफ़ी नहीं हैं इश्क़ में करना पड़ेगा सब्र 'मोहित' मोक्ष पाना इश्क़ है

Kanha Mohit

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सभी को बोझ लगता है मेरा होना ज़माने में अगर मैं बोझ बन जाऊँ मेरे पँखे के ऊपर तो

Kanha Mohit

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जब भी उस को बोलता हूँ प्यार का इज़हार कर बोलती है सब्र कर तू सब्र कर तू सब्र कर

Kanha Mohit

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रात से तेरी बातें मैं करता रहा चाँद बैठा रहा सुब्ह तक रू-ब-रू

Kanha Mohit

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अभी चाहिए और कितनी बुलंदी कि सहमा है सूरज इमारत के पीछे

Kanha Mohit

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