सादापने को देख के आया वो एक शख़्स पेचीदगी को जान के रुख़्सत भी हो चुका
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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सुख़न की दुनिया में आक़िब नए नहीं हो तुम तुम्हारे जैसे यहाँ कितने ख़ाक छानते हैं
Aqib khan
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वो तो निगाहों ने मार डाला वगरना हम पे चली है किस की
Aqib khan
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मुझ को मरवा के ही छोड़ेगी ये ताख़ीर मेरी उस की गर्दन पे जो रुक जाए है शमशीर मेरी
Aqib khan
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कितना विशालकाय समुंदर है इश्क़ का जो एक बार उतरा किनारा न पा सका
Aqib khan
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मिलेंगे कहाँ पे ये ग़म सीने वाले बता दे मुझे हर घड़ी जीने वाले
Aqib khan
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