समुंदर भी यहाँ प्यासा ही निकला नदी का होठ चू में जा रहा है
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ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर बारिशें हों तो भीग जाया कर काम ले कुछ हसीन होंठों से बातों बातों में मुस्कुराया कर
Shakeel Azmi
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इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है
Dushyant Kumar
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ये जो हिजरत के मारे हुए हैं यहाँ अगले मिसरे पे रो के कहेंगे कि हाँ
Ali Zaryoun
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तुम्हारा दिल यहाँ पर खो गया तो कैसी हैरत है बरेली में तो झुमके तक निकल जाते हैं कानों से
Ashu Mishra
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छू लेने दो नाज़ुक होंठों को, कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये क़ुदरत ने जो हम को बख़्शा है, वो सब सेे हसीं ईनाम हैं ये
Sahir Ludhianvi
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जिस्म तो बेचे ख़रीदे जा रहे हैं आवरण रिश्तों रिवाज़ों के चढ़ाकर
Umesh Maurya
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ये सारा खेल है बस दो घड़ी का नहीं कोई ठिकाना आदमी का
Umesh Maurya
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उदासी भी ख़ुशी का एक फ़न है सभी को ये ख़ुशी मिलती नहीं है
Umesh Maurya
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यही अड़चन सभी की थी कहीं मन था कहीं तन था
Umesh Maurya
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उसे मैं दूर से ही चाहता था मेरा नज़दीक का रिश्ता नहीं था
Umesh Maurya
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