ये सारा खेल है बस दो घड़ी का नहीं कोई ठिकाना आदमी का
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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ज़मीं का जल कभी बादल रहा है तमाशा ज़िन्दगी का चल रहा है
Umesh Maurya
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यही अड़चन सभी की थी कहीं मन था कहीं तन था
Umesh Maurya
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ज़ख़्म कोई और गर सहला गया तो क्या दूसरा भी बीच में गर आ गया तो क्या
Umesh Maurya
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तुम अपने को राजा समझे बैठे हो क्यूँ कुर्सी वाले कब के तुम को बेच चुके हैं
Umesh Maurya
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सही ही किया दूरियों को बढ़ा कर ग़लतफ़हमियाँ ख़ूब पाली थी हम ने
Umesh Maurya
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