ज़ख़्म कोई और गर सहला गया तो क्या दूसरा भी बीच में गर आ गया तो क्या
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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जिस्म तो बेचे ख़रीदे जा रहे हैं आवरण रिश्तों रिवाज़ों के चढ़ाकर
Umesh Maurya
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ये सारा खेल है बस दो घड़ी का नहीं कोई ठिकाना आदमी का
Umesh Maurya
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यही अड़चन सभी की थी कहीं मन था कहीं तन था
Umesh Maurya
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ज़ंजीरें तो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है इन्सानों की ही अदला बदली होती है
Umesh Maurya
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सुना है तुम भी शाइ'र बन रहे हो तुम्हें भी चोट गहरी लग गई क्या
Umesh Maurya
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