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सर नेम ख़ानदान की पहचान बन गया जितने भी मुफ़्तख़ोर थे मग़रूर हो गए कुछ लोग ख़ानदान से जूझे तमाम उम्र कुछ लोग ख़ानदान से मशहूर हो गए

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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा

Tehzeeb Hafi

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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है

Tehzeeb Hafi

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आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे

Ahmad Faraz

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आते आते मिरा नाम सा रह गया उस के होंटों पे कुछ काँपता रह गया

Waseem Barelvi

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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी

Ali Zaryoun

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ज़िंदगी भी आख़िरश तंहाई है मैं भला तन्हाई से क्यूँ डर गया

Ajeetendra Aazi Tamaam

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तन्हाई में अक्सर हद से गुजरती है जीने नहीं देती यादों की पुरवाई

Ajeetendra Aazi Tamaam

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तुम्हारे शहर में आ कर ठिकाना ढूँढ़ते हैं हम अपने शहर में होते तो घर गए होते

Ajeetendra Aazi Tamaam

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वतन की मिट्टी का मोल क्या है जो बिक चुके हैं उन्हें पता क्या वतन परस्ती का उन सेे पूछो है जिन का अब तक ज़मीर ज़िंदा मिली है गर सर पे सर कटे हैं न काम आई कोई सियासत अतीत में देखो रंग जा कर है ज़ा'फ़रानी स्वतंत्रता का

Ajeetendra Aazi Tamaam

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ज़िंदगी से जंग चाहे ज़िंदगी भर ही चले जीते जी तो मेरी जाँ अब हार मानेंगे नहीं मुस्कुरा कर ही सहेंगे चाहे जितना दर्द हो मुस्कुराने से कदाचित् रार ठानेंगे नहीं

Ajeetendra Aazi Tamaam

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