वतन की मिट्टी का मोल क्या है जो बिक चुके हैं उन्हें पता क्या वतन परस्ती का उन सेे पूछो है जिन का अब तक ज़मीर ज़िंदा मिली है गर सर पे सर कटे हैं न काम आई कोई सियासत अतीत में देखो रंग जा कर है ज़ा'फ़रानी स्वतंत्रता का
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ज़िंदगी भी आख़िरश तंहाई है मैं भला तन्हाई से क्यूँ डर गया
Ajeetendra Aazi Tamaam
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तमाम उम्र हमें साथ साथ चलना है बस इतना कह के सफ़र कर लिया जुदा उस ने
Ajeetendra Aazi Tamaam
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सौ ज़ख़्म दिल पे हैं मेरे सौ ज़ख़्म मेरी जाँ क्या एक-एक दिल मेरा दिखलाए आप को
Ajeetendra Aazi Tamaam
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तुम्हारे शहर में आ कर ठिकाना ढूँढ़ते हैं हम अपने शहर में होते तो घर गए होते
Ajeetendra Aazi Tamaam
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सर नेम ख़ानदान की पहचान बन गया जितने भी मुफ़्तख़ोर थे मग़रूर हो गए कुछ लोग ख़ानदान से जूझे तमाम उम्र कुछ लोग ख़ानदान से मशहूर हो गए
Ajeetendra Aazi Tamaam
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