सौ मिलीं ज़िंदगी से सौग़ातें हम को आवारगी ही रास आई
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हम हैं ना! ये जो मुझ सेे कहते हैं ख़ुद किसी और के भरोसे हैं ज़िंदगी के लिए बताओ कुछ ख़ुद-कुशी के तो सौ तरीक़े हैं
Vikram Gaur Vairagi
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ज़िंदगी एक फ़न है लम्हों को अपने अंदाज़ से गँवाने का
Jaun Elia
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फोन भी आया तो शिकवे के लिए फूल भी भेजा तो मुरझाया हुआ रास्ते की मुश्किलें तो जान लूँ आता होगा उस का ठुकराया हुआ
Balmohan Pandey
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झेला है मैं ने तीन सौ पैंसठ दुखों का साल चाहो तो पिछले बारह महीनों से पूछ लो
Rehman Faris
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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शब के सन्नाटे में ये किस का लहू गाता है सरहद-ए-दर्द से ये किस की सदा आती है
Ali Sardar Jafri
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परतव से जिस के आलम-ए-इम्काँ बहार है वो नौ-बहार-ए-नाज़ अभी रहगुज़र में है
Ali Sardar Jafri
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मक़तल-ए-शौक़ के आदाब निराले हैं बहुत दिल भी क़ातिल को दिया करते हैं सर से पहले
Ali Sardar Jafri
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काम अब कोई न आएगा बस इक दिल के सिवा रास्ते बंद हैं सब कूचा-ए-क़ातिल के सिवा
Ali Sardar Jafri
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ये तेरा गुलिस्ताँ तेरा चमन कब मेरी नवा के क़ाबिल है नग़्मा मिरा अपने दामन में आप अपना गुलिस्ताँ लाता है
Ali Sardar Jafri
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