shaeri mein 'mir'-o-'ghaalib' ke zamana ab kahan shohraten jab itni sasti hon adab dekhega kaun
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
Tehzeeb Hafi
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
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बहुत सताते हैं वो रिश्ते जो टूट जाते हैं ख़ुदा किसी को भी तौफ़ीक़-ए-आशनाई न दे
Meraj Faizabadi
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मैं सारी उम्र अँधेरों में काट सकता हूँ मेरे दियों को मगर रौशनी पराई न दे
Meraj Faizabadi
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सुना है बंद कर लीं उस ने आँखें कई रातों से वो सोया नहीं था
Meraj Faizabadi
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ज़िंदा रहना है तो हालात से डरना कैसा जंग लाज़िम हो तो लश्कर नहीं देखे जाते
Meraj Faizabadi
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जो कह रहे थे कि जीना मुहाल है तुम बिन बिछड़ के मुझ सेे वो दो दिन उदास भी न रहे
Meraj Faizabadi
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